जीवन में कोई किसी का स्थान नहीं ले सकता: रिश्ते में इंसान को यह सोच नहीं रखनी चाहिए कि तुम जीत गए मैं हार गया। रिश्ता मैदान की गेम नहीं है जहां हार जीत होगी, रिश्ते में सुख भी बांटे जाते हैं दुख भी और जीवन में कभी भी कोई रिश्ता किसी का स्थान नहीं ले सकता, सम्मान ले सकता है।
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जैसे मां का रिश्ता, बहन का रिश्ता, भाई का रिश्ता, पत्नी का रिश्ता, बच्चों का रिश्ता, सास-ससुर, साले-साली, बुआ, मामा, चाचे-ताये, भाभी, भतीजे, भांजा-भांजी, दामाद इन सब का अपना स्थान है और रिश्तों में पिक एंड चूज नहीं होता
इसलिए जीवन में रिश्ते में हार जीत शब्द की कोई कीमत नहीं है, हार जीत शब्द अमान्य है। जहां रिश्ता है वहां हेड और टेल नहीं की जाती क्योंकि रिश्ता मैदानी खेल नहीं है इसलिए कभी भी जीवन में किसी भी रिश्ते का स्थान कोई नहीं ले सकता और रिश्ता जब भी टूटता है या तो गलतफहमी में टूटता है या लालच में टूटता है
दोनों ही जगह रिश्ते टूटने का कारण कोई बहुत बड़ा नहीं लेकिन अगर कोई शर्त रखकर रिश्ता छोड़े या रखे तो वह रिश्ता लंबे समय तक नहीं चलते क्योंकि ऐसे रिश्तों के पीछे मोटिव होता है और बहुत सी गलतफहमियां ऐसी होती हैं जिसका निष्कर्ष जब निकलता है तो वह शून्य होता है इसलिए बने हुए रिश्ते को खराब करने से बचें।