जग में वही अमर कहलाता है जो योद्धा होता है

जग में वही अमर कहलाता है जो योद्धा होता है: मेरे पिता व इस ज्योतिकण अखबार के संस्थापक जिन्होंने इस अखबार का नींव 1974 में रखा उनकी लिखी दो लाइनें इस संपादकीय में अंकित कर रहा हूं ‘‘कमीने तो कमीनी हरकतें करते जमाने में लेकिन वो सबसे बड़े कमीने हैं जो कमीनों की बातो ंमें आते हैं’’ किसी के घर को आग लगाने का मकसद कुछ भी हो लेकिन जिस व्यक्ति को आग लगाने का शौक पड़ गया एक दिन उसका घर भी जलना तय है

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क्योंकि हमारे धार्मिक ग्रंथ, गुरूजन, माता पिता यही संस्कार देते हैं किसी का भला करो न करो लेकिन किसी का बुरा मत करो। कबीर जी ने तो बड़े सुंदर शब्दों में ‘‘कहा भला किसी का कर न सको तुम बुरा किसी का मत करना, पुष्प नहीं बन सकते तो कांटे बनकर मत चलना’’ अर्थात आग लगाने वाला कभी बड़ा नहीं बन सकता, उसका इतिहास नहीं लिखा जा सकता।

इतिहास आग को बुझाने वाले का ही लिखा जाएगा और योद्धा भी वही बन सकता है वही अमर कहला सकता है जो जंग के मैदान में लड़े। जो हर कर भी हार न माने, जो टूट कर भी जुड़ जाए।

जो मिटकर भी मुस्कुराए उसे ही योद्धा कहा जाता है। इसलिए ऐसे लोगों से हमेशा किनारा करें जो आपके लिए कभी भी सांप की तरह अपनी भूमिका में न आ सकें।

ऐसा नहीं है कि गैर ही आपको मारता है या मार सकता है आज कल तो खून के भी कई रंग हुए, बेरंग हो गया खून और कहां आकर अपना ही खून पानी में तबदील हो जाए कुछ पता नहीं इसलिए ज्यादा आशा में न रहें धन उतना ही रखें जितना आपको लगे कि आपका समय इज्जत से कट जाए।

वैसे तो आज के युग में समाज में पैसा ही प्रधान है लेकिन मैंने यह भी पढ़ा है कि हाथों की पांचों ऊंगलिया एक समान नहीं होती इसलिए संकीर्ण मानसिकता रखने वालों का भी ईलाज रखें।