मेरा कसूर इतना है की मैं भयमुक्त हूं: बहुत प्यारी शायर की लाइनें हैं ‘‘आंधियों में भी जो जलता दीया मिल जाएगा उस दीए से पूछ लेना वीरेश शांडिल्य का पता मिल जाएगा’’ दोस्तों व समाजवासियों मेरे विरोधियों, मेरे धूरविरोधियों, मेरे स्वस्थ आलोचकों यह संपादकीय इसलिए लिख रहा हूं कि इसमें मेरा क्या कसूर है कि मुझे डर नहीं लगता, मैं भयमुक्त हूं क्योंकि हमारे धार्मिक ग्रंथ कहते हैं जन्म झूठ है मौत सत्य है
अब तो थाने चौकियों में डर हो गया काम कर नहीं तो ओपी सिंह आ जाएगा
रेप के झूठे मुकदमें दर्ज करने वालों पर कड़ा एक्शन लें डीजीपी ओपी सिंह
और इंसान दो बार भी नहीं मरता फिर भय किस चीज का? सिर्फ कुछ लोग आपको डराने के लिए, नीचा दिखाने के लिए आपको बदनाम करने के लिए, आपके साथ छल करते हैं, आपको ब्लैकमेल करते हैं और तरह तरह की अभद्र शब्दों का इस्तेमाल कर यह भी संदेश दे देते हैं कि उनकी औकात कितनी है ऐसे लोग चाहे अपने हों या बेगाने उनके लिए मेरी दो टूक सलाह है कि मार सकते हो मार दो।
अधमरा कर सकते हो अधमरा कर दो जीवन लीला खत्म कर सकते हो तो जीवन लीला खत्म कर दो लेकिन अगर बच गया फिर अपने पांव पर खड़े हो गया तो सारा जन्म इसी बात पर पछताओगे कि मेरे साथ क्या बना।
मैंने इस आदमी से माथा क्यों लगाया। कोई कहता है औरत से नहीं लड़ना चाहिए, कोई कहता है बच्चों से नहीं लड़ना चाहिए, कोई कहता है दोस्तों से नहीं लड़ना चाहिए, कोई कहता है अगर आपको कोई एक थप्पड़ मारता है तो दूसरा गाल भी आगे कर दो तो हर व्यक्ति का एक जैसा टेम्परामेंट कैसे हो सकता है जब भगवान ने 140 करोड़ लोगों का हुलिया एक जैसा नहीं बनाया, एक जैसा स्तर नहीं बनाया तो फिर हर आदमी कैसे दब जाएगा? क्यों ब्लैकमेल हो इसलिए जिसमें दम है वो लड़े हम तो जितने दिन जीएंगे भयमुक्त जीएंगे किसी को अपनी बाजू पर गुमान है तो छेड़ कर देख लो।