हमने अता की थी जिन्हें धड़कनें वो जब बोलने लगे तो हम ही पर बरस पड़ें

हमने अता की थी जिन्हें धड़कनें वो जब बोलने लगे तो हम ही पर बरस पड़ें: हमने अता की थी जिन्हें धड़कनें वो जब बोलने लगे तो हम ही पर बरस पड़ें’’ जिन्हें ऊंगली पकड़कर चलना सीखाया आज उन्हीं ने धक्का देकर गिरा दिया और धक्का भी ऐसा दे दिया कि जीवन में खड़े ही न हो सकें।

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क्या जिन लोगों को धड़कने अता की थी क्या उनसे ये उम्मीद थी कि वह सबसे पहले हम पर ही बरसेंगे। खैर जिसकी जितनी सोच वह उतना ही काम कर सकता है। पुरानी कहावत है जैसा खाओ अन्न वैसा बने मन।

जिनको धड़कने अता की और इस लायक बनाया कि वह समाज में अपनी बात मजबूती से रख सकें लेकिन सबसे पहले उन्होंने अपनी जुबान का इस्तेमाल हमें ही नीचा दिखाने में कर दिया। क्या इस बात को कभी भुलाया जा सकता है या भूला जा सकता है कि जब मेरा ही मेरे ऊपर बरसा तो मुझे जमाने से शिकायत खत्म हो गई अब तो सोचता हूं कि क्या जिंदगी इससे और बुरा भी दिखाएगी।

फिलहाल मैं उसके बरसने से पहले से ज्यादा मजबूत हुआ हूं और अपनी औकात का लगातार आंकलन कर रहा हूं, चिंतन कर रहा हूं, मंथन कर रहा हूं क्योंकि वो तो मेरे मरने का इंतजार कर रहा है लेकिन मुझे मौत नहीं आ रही इसमें मेरा क्या कसूर है जिसको धड़कने अता की है जब वह बोलना सीख गया तो मेरा मरने का भी इंतजाम करवा दे ताकि उसकी आत्मा को शांति मिल जाए क्योंकि स्वाभिमानी व्यक्ति फायदे या नुकसान की परवाह नहीं करता क्योंकि भगवान कृष्ण ने अर्जुन को स्पष्ट संदेश दिया कि जो तेरे पास है वो यही से लिया तू तो खाली आया था खाली जाएगा।

हां जो मेरे ऊपर बरसे वो मेरी आंख बंद होने के बाद मुझे ढूंढते ढूंढते फिरेंगे और उनके पास पछताने के इलावा कुछ नहीं बचेगा उसमें चाहे समाज हो परिवार हो, भाई हों, बहने हों, बच्चे हों, दोस्त हों, उन सब के लिए मेरा संदेश अहम है क्योंकि जब जब मैंने कलम उठाई मैंने समाज को राह दी, मैंने समाज को रोशनी दी। बड़ा व्यक्ति किसी को नीचा दिखा कर नहीं बना जा सकता।

बड़ा बनने के लिए त्याग करना पड़ता है, बड़ा बनने के लिए बड़ी सोच रखनी पड़ती है। परिवार हो, समाज हो, दोस्ती हो, कुटुब हो उसे जब मर्जी बिखेरा जा सकता है लेकिन जो व्यक्ति रोशनी देगा समाज को वो कभी बिखेरने की सोच नहीं रखता मैंने 35 साल के लंबे सफर में अनेकों उतार चढ़ाव देखे और कभी किसी उतार चढ़ाव से भयभीत नहीं हुआ और जिनको धड़कने अता की वो भी गलत फहमी को त्याग दें कि मेरे को डरा कर मेरे से कुछ हासिल किया जा सकता है।