मदर-इन-लॉ शब्द मां का विकल्प नहीं बन सकता: मांवा ठंडिया छांवा, मां जैसी दुनिया में है कोई कहां। जो कोख से जन्म देती है उस मां का इस दुनिया में कोई विकल्प नहीं। मां देवी देवताओं, ऋषि मुनियों, पीरों फकीरों को जन्म देती है। मां खुद गीले में सो कर बच्चे को सुखे में सुलाती है।
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मां खुद भूखा रहकर बच्चों का पेट भरती है। कुछ देर तक बच्चे आंखों से ओझल हो जाएं तो मां विचलित हो जाती है, परेशान हो जाती है। वो लोग बड़े भाग्यशाली हैं जिनके पास मां है।
और वो अभागे हैं जिनके पास मां नहीं हैं। इसलिए मां का सम्मान हद से ज्यादा करें। वहीं मां का रिश्ता कुछ लोगों ने अन्य रिश्तों में बनाने का प्रयास किया जैसे मदर इन लॉ जबकि मदर इन लॉ कोई शब्द नहीं होता इस शब्द में कोई दिल की ममता नहीं होती क्योंकि दामाद को अपनी कोख से जन्म नहीं दिया होता।
अपनी कोख से जिस लड़की को जन्म देकर मां दामाद के साथ भेजती है उस लड़की को जरा सी आंच आ जाए तो मां तकलीफ में आ जाती है क्योंकि वो लड़की उस मदर इन लॉ की कोख से पैदा की हुई लड़की है, दामाद मरे जीए कटे, किसी दुनिया की मदर इन लॉ को कुछ नहीं लेना।
उसे तो बस अपनी लड़की से मतलब है। दामाद तो मदर इन लॉ के लिए फोरमैल्टी या सामाजिक परंपरा है इसलिए दामाद कितनी ही तकलीफ में रहे मदर इन लॉ को कोई फर्कनहीं पड़ता यही कारण है कि आज तक इस दुनिया में मां का विकल्प कोई मदर इन लॉ नहीं बन सकी और न रहती दुनिया तक मां का विकल्प कोई मदर इन लॉ बन नहीं सकती है
क्योंकि मां अपने बच्चे को जब तक देख न ले उससे बात न कर ले उसका हाल चाल न पूछ ले कि तूने रोटी खाई या नहीं खाई तेरा काम कैसा चल रहा है तब तक मां को नींद नहीं आती। इसलिए मां का रिश्ता बहुत पवित्र है और रहती दुनिया तक मां का रूतबा और रिश्ता भगवान से ऊंचा रहेगा।