सुप्रीम कोर्ट देश की जिला अदालतों में भी सीसीटीवी कैमरे लगाने के आदेश दें: अंबाला। (ज्योतिकण): एंटी टेरोरिस्ट फ्रंट इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेश शांडिल्य ने सुप्रीम कोर्ट के नवनियुक्त चीफ जस्टिस व हरियाणा के मूल निवासी जस्टिस सूर्यकांत के इस ब्यान का जोरदार स्वागत किया जो उन्होंने कहा कि न्यायपालिक भारतीय लोकतंत्री की रीढ़ है और स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाला कोई भी हस्तक्षेप संविधान की आत्मा पर चोट माना जाएगा।
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वहीं वीरेश शांडिल्य ने नवनियुक्त चीफ जस्टिस सूर्यकांत को पत्र लिखकर मांग की है कि देश की जिला अदालतों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं जिससे अदालती कामों में अड़चन डालने वालों और अदालत कक्ष में दोनों पक्षों का आचरण कैद हो सके इससे बेंच और बार की गरिमा बढ़ेगी और कोई भी व्यक्ति चाहे वो बेंच हो या बार लक्ष्मण रेखा पार नहीं कर पाएगा।
वीरेश शांडिल्य ने चीफ जस्टिस को लिखे पत्र में मांग की है कि उनके इस पत्र को जनहित याचिका ट्रीट कर देश की अदालतों में सीसीटीवी कैमरै लगाने के आदेश दें। एंटी टेरोरिस्ट फ्रंट इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेश शांडिल्य ने कहा कि उन्होंने 2008 में अदालतों को जेलों से वीडियो कांफे्रेंसिंग से सुनवाई को लेकर जनहित याचिका हाईकोर्ट में दायर की थी
जिस पर हाईकोर्ट ने अहम फैसला लेते हुए उनकी जनहित याचिका को स्वीकार करते हुए हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ की अदालतों में जेलों से अरोपियों की वीडियों कांफ्रेंसिंग से शुरू हुई थी और आज पूरे देश में जेलों से आरोपियों की वीडियो कांफ्रेंसिंग से अदालतें सुनवाई कर रही हैं।
एंटी टेरोरिस्ट फ्रंट इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेश शांडिल्य ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अगर अदालतों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने के आदेश देता है तो इससे सुनवाई में तेजी होगी और अदालतों में बेंच, बार व आरोपियों व शिकायतकर्ताओं की मनमर्जियां खत्म होगी और अदालत का समय भी नष्ट नहीं होगा।
वहीं वीरेश शांडिल्य ने सुप्रीम कोर्ट को लिखे पत्र में कहा कि वह देश की जिला अदालतों में यह भी सुनिश्चित करें कि आरोपी जिस वक्त भी अदालत में पेश होता है तो जिमनी आर्डर में उसके पेश होने का टाइम और कौन पुलिस कर्मी और अधिकारी उसको पेश कर रहे हैं उनका नाम और मोबाइल नंबर जिमनी आर्डर में दिया जाए इससे आरोपी को कानूनी संरक्षण मिलेगा।