हिरासत में मौत को सुप्रीम कोर्ट ने धब्बा बताकर मील पत्थर फैसला दिया

हिरासत में मौत को सुप्रीम कोर्ट ने धब्बा बताकर मील पत्थर फैसला दिया: अंबाला। (ज्योतिकण): एंटी टेरोरिस्ट फ्रंट इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेश शांडिल्य ने कहा कि देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस हिरासत में हिंसा व मौत को व्यवस्था पर धब्बा बताकर मील पत्थर फैसला दिया जो फैसला संविधान को मजबूत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिया निश्चित तौर पर पुलिस हिरासत में मार पीट व आरोपियों के मरने का सिलसिला रूकेगा।

वीरेश शांडिल्य को मौत की धमकी देने वाले आरोपी को नहीं दी कोर्ट ने जमानत

मेयर सैलजा सचदेवा ने उठाई अवैध कॉलोनियों को वैध करने की मांग

वीरेश शांडिल्य आज अपने कार्यालय में पत्रकारों से बात कर रहे थे उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता ने स्वत: संज्ञान लेते हुए राजस्थान में 8 महीनों में पुलिस हिरासत में 11 मौतों पर कड़ा संज्ञान लिया और सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब देश इसे बर्दास्त नहीं करेगा। पुलिस हिरासत में किसी को मारा नहीं जा सकता।

एंटी टेरोरिस्ट फ्रंट इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेश शांडिल्य ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में देश के तमाम पुलिस महानिदेशकों व देश के गृह सचिव सहित तमाम राज्यों के गृह सचिवों को नोटिस जारी करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी सरकारी संस्था हो या पुलिस संविधान से ऊपर नहीं है और राजस्थान में जो 8 महीने में पुलिस हिरासत में 11 मौतें हुई हैं इस पर सुप्रीम कोर्ट को राजस्थान के डीजीपी व राजस्थान के गृह सचिव को कठघरे में खड़ा करना चाहिए क्योंकि ऊपर के अधिकारियों के इशारे के बिना पुलिस हिरासत में हिंसा व मौत संभव नहीं।