कई दशको पहले गीत लिखा गया ‘‘बात पते की कहे अनाड़ी, खेल तमाशा देखे दुनिया सारी’’ अर्थात दुनिया का काम आग लगाना है वो आग लगाते रहेंगे, समाज में अगर आग लगाने वालों को याद किया जाता है तो आग को बुझाने वालों का नाम भी रहती दुनिया तक याद रहता है
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इसलिए हमें दुनियावी बातों से नहीं डरना चाहिए। कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना। अगर यहां विजय दशमी पर भगवान राम को याद किया जाता है तो विद्धान रावण को भी याद किया जाता है।
गीत गाने वालें ने क्यों कहा बात पते की कहे अनाड़ी। यह बात कोई और नहीं यह है कि कुछ लोग कहते हैं कि समय हर घाव को भर देता है यह गलत बात है शब्दों के घाव को समय नहीं भर सकता।
जब भी अपशब्द कहने वाला व्यक्ति सामने आएगा तब वह अपशब्द याद आएंगे इसलिए हर चीज को वक्त नहीं भरता। कुछ शब्द ऐसे होते हैं जिनकी कोई भरपाई, कोई माफी नहीं होती और वह अपशब्द असंसदीय शब्द किस व्यक्ति ने किसको कहे यह मायने रखता है।
अगर पुत्र पिता को, शिष्य गुरू को, पत्नी पति को कभी जीवन में अपशब्द कहे शायद उन शब्दों की माफी या भरपाई नहीं हो सकती इसलिए पुराने बुजुर्ग कहते हैं बोलने से पहले तोलना चाहिए और वैसे तो जो व्यक्ति किसी को अपशब्द बोल रहा है गाली गलौच कर रहा है, अपमान कर रहा है प्रतिशोध लेने के लिए अपने पिता को ही नीचा दिखा रहा है ऐसा पुत्र समाज में पुत्र कहलाने के लायक नहीं होता इसलिए समाज में उन लोगों से दूरी बना लें जो अपना होकर अपनों का सम्मान नहीं कर सकते। ऐसे लोगों से दूरी भली है चाहे वह समाज है, दोस्त है, परिवार है, कुटुंब है।