पूत कपूत का उदाहरण सत्य है: पुराने बुजुर्ग अक्सर कहते थे ‘‘पूत कपूत तो क्यों धन संचय, पूत सपूत तो क्यों धन संचय’’ बात बड़ी छोटी है लेकिन शब्दों के मायने मील पत्थर हैं। कहते हैं शब्द दिल में भी उतार देते हैं और दिल से भी उतार देते हैं।
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आज के मां बाप से बच्चे पूछते हैं कि आपने हमारे लिए क्या किया जो किया आपका फर्ज था। आप हमारे से कोई उम्मीद न करें। एक समय ऐसा भी था कि मां बाप के सामने बच्चे स्कूल की फीस मांगते हुए भी सामने जाने से कतराते थे लेकिन अब मां बाप का कोई सम्मान नहीं और आज श्रवण पुत्र तो शायद पैदा होने बंद हो गए
लेकिन वर्तमान मां बाप को इन परिस्थितियों में विचलित होने की जरूरत नहीं है और धन के पीछे भागने की जरूरत नहीं है और न ही बच्चों के लिए कुछ जोड़ने की जरूरत है बस इस बात पर गौर करें और भगवान से इतना मांगे ‘‘ हे प्रभु इतना दीजिए जामा कुटुंब समाए, मैं भी भूखा न रहूं मेरा साधू भी भूखा न जाए’’ हां, अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दो, उनको अपने पैरों पर खड़ा कर पक्षी की तरह छोड़ दो ताकि वह खुद उड़ना सीखे खुद अपने दानें का इंतजाम करें।
अगर कमा कमाकर बच्चों को घोड़ा, गाड़ियां और संपत्ति देंगे तो उसका अंत में नतीजा यह होगा कि आप आंसू नहीं खून के आंसू बहाएंगे इसलिए इस दोहे पर जिंदगी जीओ कि पूत कपूत तो क्यों धन संचय, पूत सपूत तो क्यों धन संजय अर्थात अगर बच्चा नालायक होगा तो कमाया हुआ धन भी नष्ट कर देगा और बच्चा लायक होगा तो खुद अपने पांव पर खड़ा हो जाएगा इसलिए मां बाप हाय तौबा न करें और 3 समय की रोटी और इज्जत से जीने की चाह रखें।
आज बच्चों से कोई भी मां बाप उम्मीद नहीं कर सकता और न ही मां बाप को बच्चों से कोई उम्मीद करनी चाहिए। बदनाम बेचारी बहुएं हो जाती हैं कि लड़के को बिगाड़ दिया जबकि सोच अपनी घटिया हो चुकी है।