पूर्व मंत्री संपत सिंह ने कांग्रेस से दिया इस्तीफा

पूर्व मंत्री संपत सिंह ने कांग्रेस से दिया इस्तीफा: हरियाणा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री संपत सिंह ने आज भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजते हुए कहा कि कांग्रेस अब जनता की नहीं, एक व्यक्ति और परिवार की पार्टी बन चुकी है।

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हरियाणा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री संपत सिंह ने आज भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजते हुए कहा कि कांग्रेस अब जनता की नहीं, एक व्यक्ति और परिवार की पार्टी बन चुकी है।

छह बार के विधायक, दो बार मंत्री और एक बार नेता प्रतिपक्ष रहे संपत सिंह ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि साल 2009 में कांग्रेस ज्वाइन करने के बाद से उन्हें लगातार नजरअंदाज किया गया और संगठन में किसी प्रकार की जिम्मेदारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि पार्टी में गुटबाजी और परिवारवाद ने जड़ों को खोखला कर दिया है।

संपत सिंह ने लिखा कि कांग्रेस में आज निष्ठा का इनाम दासता है और मतभेद की सजा निष्कासन। 2009 से लगातार हार के बावजूद किसी से जवाबदेही नहीं ली गई।

जो नेता पार्टी को डुबो रहे हैं, वही शीर्ष पर बने हुए हैं। उन्होंने अपने पत्र में कई वरिष्ठ नेताओं में भजनलाल, राव इंदरजीत सिंह, बीरेंद्र सिंह, धरमबीर सिंह, कुलदीप बिश्नोई, अशोक तंवर, अवतार भड़ाना के नाम गिनाते हुए कहा कि अपमान और उपेक्षा की वही परंपरा आज भी जारी है।

संपत सिंह ने कहा कि 2024 के विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए “अध्ययन का विषय” होना चाहिए था क्योंकि मीडिया सर्वेक्षणों में जीत की भविष्यवाणी के बावजूद पार्टी बुरी तरह हारी।

उन्होंने आरोप लगाया कि टिकट चोरी और वोट चोरी के जिम्मेदार लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि हरियाणा की जनता अब राज्य और राष्ट्रीय नेतृत्व दोनों से निराश है। पार्टी का संगठन जर्जर हो चुका है। 2005 में भजनलाल जी के नेतृत्व में कांग्रेस ने 67 सीटें जीती थीं, लेकिन तब से पराजय का सिलसिला थमा नहीं है।

संपत सिंह ने कुमारी सैलजा के साथ हुए व्यवहार को लेकर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि 2024 के चुनाव में सैलजा को हाशिए पर डाल दिया गया, उनके खिलाफ जातिसूचक टिप्पणियां फैलाने दी गईं और उनके समर्थकों को टिकट से वंचित किया गया, जिससे दलित वर्ग पूरी तरह कांग्रेस से दूर हो गया।

अपने इस्तीफे के अंत में संपत सिंह ने लिखा कि मैं एक गर्वित हरियाणवी हूं और अपने प्रदेश की जनता को निराश नहीं कर सकता। हरियाणा के प्रति मेरी प्रतिबद्धता अटूट है, परंतु वर्तमान कांग्रेस नेतृत्व में मेरा विश्वास समाप्त हो गया है। इसलिए मैं कांग्रेस से अपना त्यागपत्र देने के लिए विवश हूं।

संपत सिंह साल 1982 से राजनीति में सक्रिय हैं और राज्य की राजनीति में उन्हें एक बौद्धिक और सशक्त वक्ता के रूप में जाना जाता है। उनके इस्तीफे को हरियाणा कांग्रेस के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।