फिर न सिमटेगी जो बिखर जाएगी जिंदगी जुल्फ नहीं जो फिर संवर जाएगी

शब्दों का इस्तेमाल कौन किसपर कर रहा है कौन बड़े पर कर रहा है कौन छोटे पर कर रहा है इतनी गरिमा हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए इतनी शर्म, हया ध्यान में रखनी चाहिए क्योंकि अशिक्षित व्यक्ति, अनपढ़ व्यक्ति, इलिट्रेट व्यक्ति कोई अपशब्द बोल दे तो बात यह कहकर खत्म हो सकती है यार उसकी अनपढ़ की बात क्यों सुन रहे हो’’

हमने अता की थी जिन्हें धड़कनें वो जब बोलने लगे तो हम ही पर बरस पड़ें

अंबाला शहर में कूड़े के ढेर और टूटी सड़कों से जनता परेशान

‘‘फिर न सिमटेगी जो बिखर जाएगी, जिंदगी जुल्फ नहीं जो फिर संवर जाएगी, लाख दिखाए जन्नत के ख्वाब कोई, अपनी हंस के न सही रो के कट जाएगी, जिंदगी जुल्फ नहीं जो फिर संवर जाएगी’’।

इंसान अपनी जिंदगी को अपनी जुल्फों(बालों) की तरह न समझें कि जब चाहे कंघी उठाओ या सैलून पर जाओ ठीक कर लो अगर जिंदगी में कोई चोट दे जाए, मायूसी दे जाए, कोई अपशब्द कह जाए, कोई अपना ही आपको बर्बाद करने की राह पर जाए तो वह जिंदगी बालों की तरह संवर नहीं सकती इसलिए पुराने बुजुर्ग कहते थे कि अगर कुंए की तरफ मुंह करके राम राम बोलों तो कुंआ 7 बार राम राम बोलता है

और कुंए की तरफ मुंह करके मां की या बहन की गाली दो तो वो कुंआ 7 बार ही गाली भी लौटाता है यही कारण है कि बुजुर्ग जीते जी बच्चों को शिक्षा देते हैं कि बोलने से पहले तोलना चाहिए क्योंकि शब्द दिल में भी उतार देते हैं और दिल से भी उतार देते हैं शब्द रूपी बानों के जख्म कभी सूख नहीं सकते। और न ही इस धरा पर शब्द रूपी जख्मों को भरने की दवाई बनी है

इसलिए शब्दों का इस्तेमाल कौन किसपर कर रहा है कौन बड़े पर कर रहा है कौन छोटे पर कर रहा है इतनी गरिमा हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए इतनी शर्म, हया ध्यान में रखनी चाहिए क्योंकि अशिक्षित व्यक्ति, अनपढ़ व्यक्ति, इलिट्रेट व्यक्ति कोई अपशब्द बोल दे तो बात यह कहकर खत्म हो सकती है यार उसकी अनपढ़ की बात क्यों सुन रहे हो वो तो अनपढ़ है गंवार है उसे समाज में कुत्ता नहीं पूछता तुम तो पढ़े लिखे हो लेकिन अगर शिक्षित व्यक्ति
लक्ष्मण रेखा पार कर समाज में रिश्तों की परवाह किए बिना अपशब्दों के बान मारता है तो वह शायद उन शब्दों के लिए जख्मों की भरपाई नहीं हो सकती इसलिए अगर हम किसी का अच्छा न करें तो हमें बुरा करने का अधिकार नहीं।

हमें भगवान के अधिकारों का इस्तेमाल नहंी करना चाहिए वह सुप्रीम है तीसरी आंख उसकी सब देख रही है उसको फैसला लेने दो, किसकी गलती पर क्या सजा देनी है, जिनको समाज में उठना बैठना सीखाया जाए, पहचान दीजाए,शोहरत दी जाए, नाम दिया जाए, रूतबा दिया जाए जब ऐसे लोग आपको नीचा दिखाएं तो फिर आपका हर मकसद खत्म हो जाता है। बहुत प्यार शेयर है ‘‘मेरे ही तराशे पत्थर आज मंदिर में भगवान बने बैठे हैं’’।