इंसान की फितरत में नीचता नहीं होनी चाहिए: नस्ली और गैर नस्ली मतलब खानदानी और गैर खानदानी इनके बारे में हमें पढ़ना चाहिए कि नस्ली लोगों की फितरत क्या होती है। हम कई बार जो कुछ देखते हैं जरूरी नहीं वह सत्य है और हम जो कुछ सुनते हैं जरूरी नहीं वह भी सच हो लेकिन इसकी परख सिर्फ नस्ली आदमी कर सकता है।
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जो व्यक्ति खानदानी होगा, नस्ली होगा वह हर बात पर चिंतन करेगा लेकिन जो व्यक्ति नस्ली नहीं होगा जिसकी सोच संकीर्ण होगी वह अपना ही नहीं आस पास का वातावरण व शुद्धता भी नष्ट कर देता है शायद उसे ऐसा करने से खुशी मिलती है लेकिन ऐसे लोग समाज में लंबी रेस का घोड़ा नहीं होते ऐसे लोग समाज के लिए घातक होते हैं और बहुत जल्दी अपना विश्वास खत्म कर देते हैं
लेकिन जो व्यक्ति नस्ली होगी उसकी अंत तक यही सोच रहेगी कि समाज में किसी भी तरीके से भाईचारा रिश्ते खंडित न हो। हमें नस्ली इंसान बनना होगा क्योंकि दोगले इंसान, गैर नस्ली इंसान की कीमत तो नेचर भी नहीं करती ऐसे लोग किसी भी विश्वास के योग्य नहीं होते, किसी को नीचा दिखाना बड़ा आसान है लेकिन किसी का सम्मान करना और यह दर्शाना कि सामने वाले का आदर उनसे ज्यादा है वह व्यक्ति नस्ली होता है।
हमें समाज में, परिवार में ऐसे लोगों से बचना है जो झूठी शान के लिए अपने तमाम रिश्तों को आग में झोंक देते हैं ऐसे रिश्ते समाज में सायनट(जहर) से भी ज्यादा खतरनाक हैं ऐसे रिश्ते रखने की बजाए इंसान को अकेला रहना ज्यादा बेहतर है इसलिए हमें नस्ली बनकर समाज में आगे बढ़ना है अपनों का अगर सम्मान नहीं कर सकते तो अपमान न करें, अगर रिश्तों को जोड़ न सकें तो अपने फर्जी स्वाभिमान के कारण उन रिश्तों को न तोड़ें।