दस साल असीम गोयल कहां रहा अब वाहवाही क्यों?

दस साल असीम गोयल कहां रहा अब वाहवाही क्यों? असीम गोयल को 2014 में पहली बार मोदी लहर में टिकट मिला था और मोदी लहर के कारण असीम गोयल हरियाणा की सबसे बड़ी पंचायत के सदस्य चुने गए और 2019 में दूसरी बार फिर मोदी लहर का फायदा मिला

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असीम गोयल विधानसभा पहुंचे लेकिन 2014 से 2024 तक असीम गोयल ने मनमर्जी की और उसके तमाम प्रोजेक्ट करोड़ों लगने के बाद भी बंद पड़े रहे उसका नतीजा यह निकला की पार्टी ने असीम गोयल को तीसरी बार टिकट तो जरूर दिया लेकिन असीम गोयल चुनाव हार गया।

असीम गोयल की किस्मत अच्छी थी कि नायब सैनी राज्य के सीएम बन गए और उनकी नायब सैनी से नजदियां जगजाहिर थी और हारने के बाद भी असीम गोयल राजनीतिक तौर पर जीवित हो गए।

जब मेयर का चुनाव चल रहा था तो मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक मंच से कहा था कि असीम गोयल भले ही एमएलए नहीं है लेकिन इसकी पहले से ज्यादा चलेगी और आजकल पुरानी कहावत है

कि चढ़ते सूरज को सलाम जो असीम से बात नहीं करना चाहते थे या उसकी शक्ल नहीं देखना चाहते थे वह उसके तलवे चाट रहे हैं और ऐसे जन्मदिन तो 2014 से 2024 तक एमएलए रहते हुए असीम गोयल के नहीं हुए जैसे जन्मदिन असीम गोयल के हारने के बाद हो रहे हैं, जगह जगह होर्डिंग बोर्ड बड़े बड़े कारोबारी लगवा रहे हैं क्योंकि बिजनेस मैन हो या जनता जहां लगता है

कि यार इसकी ठीक चल रही है उसकी जाकर हाजिरी भरनी शुरू हो जाती है क्योंकि आज के युग में मतलबी लोगों के लिए धर्म से धड़ा बड़ा नहीं, जात से जमात बड़ी नहीं बल्कि अपना फायदा कैसे उठे उसी रास्ते पर चलते हैं।

अगर असीम गोयल 2014 से 2024 तक लोगों को साथ रखता, पोजिटिव सोच रखता, विकास कार्यों को पूरा करवाता तो वह आज तीसरी बार भी विधायक होता, उसकी जिद उसे ले डूबी, लेकिन आज वह विधायक नहीं है जीतता तो मंत्री भी बनता, अपने पांव पर असीम ने खुद कुल्हाड़ी मारी।